
फर्जी मुकदमा लिखवाओगे तो जेल जाओगे,” कोर्ट ने सिखाया कानून का मतलब; एसीपी की जांच ने “झूठ” को नंगा कर दिया।
रिपोर्ट राजेश कुमार यादव
लखनऊ उत्तर प्रदेश
लखनऊ – उत्तर प्रदेश की न्याय व्यवस्था में एक ऐसा फैसला आया है, जिसने उन लोगों की नींद उड़ा दी है जो फर्जी मुकदमे को अपनी जेब में रखते हैं। लखनऊ की एक अदालत ने फर्जी एससी/एसटी एक्ट के मुकदमे में एक वकील को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, और तो और, तीन लाख का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने इस “दुस्साहसिक” काम को करने वाले वकील परमानंद गुप्ता को कानून का ऐसा पाठ पढ़ाया है, जिसे वो जीवन भर नहीं भूल पाएंगे।
इस नाटक में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस महिला (पूजा रावत) के नाम पर फर्जी एफआईआर लिखी गई थी, उसे कोर्ट ने “निर्दोष” करार दिया। पता चला कि वो तो उस जगह कभी गई ही नहीं थी, जहां “आपत्तिजनक” घटना हुई थी। ये तो वही बात हो गई कि ‘शादी कहीं और, और शहनाई कहीं औरलेकिन कहानी में एक “सुपरहीरो” की एंट्री होती है- एसीपी राधारमण सिंह। जब मामला उनके पास आया, तो उन्होंने अपनी जांच का जादू ऐसा चलाया कि सारे झूठ धुआं-धुआं हो गए। उनकी मेहनत और ईमानदारी को देखकर कोर्ट भी मंत्रमुग्ध हो गई और खुले दिल से उनकी तारीफ की।यह फैसला उन सभी शौकीनों के लिए एक जोरदार तमाचा है जो कानून को अपनी जागीर समझते हैं। यह साबित करता है कि कानून अंधा जरूर है, लेकिन इतना भी नहीं कि उसे फर्जी मुकदमा दिखा कर गुमराह कर दिया जाए!

